मेरे लहजे में जी हुजूर न था, इसके अलावा मेरा कोई कसूर न था।


मेरे लहजे में जी हुजूर था,
इसके अलावा मेरा कोई कसूर था।


जलो वहाँ, जहाँ जरूरत हो,
उजालों में चिरागों के मायने नहीं होते।
आज का दिन भी ऐश से गुजरा,
सर से पाँव तक बदन सलामत है।



प्यासे जब भी पानी-पानी करते हैं,
दरिया वाले आना-कानी करते हैं।


लफ्ज बदल जाते हैं वरना,
दुनिया में कोई बात नयी बात नहीं।

 


Mere Lehje Mein Jee Hujoor Na Tha,
Iske Alaawa Mera Koi Kasoor Na Tha.

Jalo Wahaan, Jahaan Jaroorat Ho,
Ujaalon Mein Chiraagon Ke Maayane Nahin Hote.
Lehje Mein Jee Hujoor Na Tha - Two Line Shayari

Aaj Ka Din Bhi Aish Se Gujara,
Sar Se Paanv Tak Badan Salaamat Hai.

Pyaase Jab Bhi Paani Paani Karte Hain,
Dariya Waale Aana-Kaani Karte Hain.


Lafz Badal Jaate Hain Varna,
Duniya Mein Koi Baat Nayi Baat Nahin.


 

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